Gunjan Saxena फिल्म पर बवाल – Srividya Rajan ने कहा कि झूठी हैं फिल्म की कहानी

14 जून को डिजिटल प्लेटफार्म पर रिलीज़ हुई फिल्म “Gunjan Saxena: The Kargil Girl” पर लगातार विवाद चल रहा हैं। फिल्म में Gunjan Saxena का रोल Janhvi Kapoor ने निभाया हैं। हाल ही में फिल्म रिलीज़ के बाद उसकी कहानी और स्क्रीनप्ले को लेकर भारतीय वायु सेना ने विरोध जताया था। और अब एक नया मामला सामने आया हैं, दरअसल गुंजन की साथी रह चुकी एक महिला ऑफ़िसर फ्लाइट लेफ्टिनेंट Srividya Rajan ने सवाल खड़े किये हैं , और उनका दावा हैं कि वे पहली महिला पाइलट हैं जिसने कारगिल से उड़ान भरी थी।

Srividya Rajan का कहना हैं कि फिल्म “Gunjan Saxena” की कहानी को गलत दिखाया गया हैं। उन्होंने फिल्मकार पर झूठी कहानी दिखाने का आरोप लगाया हैं। वे कहती हैं कि गुंजन सक्सेना बेस पर अकेली महिला नहीं थी, और ना ही ऑपरेशन के लिए जाने वाली अकेली महिला पाइलट थी।

Srividya Rajan ने फेसबुक पर एक लम्बी Post डाल कर कारगिल युद्ध के दौरान की कहानी बताई हैं।

इस पोस्ट में श्रीविद्या ने बताया कि ट्रेनिंग के दौरान वो और गुंजन साथ थे। 1996 में उधमपुर में दोनों साथ में पोस्टेड थे, जबकि मूवी में दिखाया गया है कि यूनिट में गुंजन अकेली महिला पायलट थीं। श्रीविद्या ने अपनी पोस्ट में स्वीकार किया है कि पहली महिला ऑफ़िसर्स होने के नाते उन्हें कुछ साथियों के पूर्वाग्रहों का सामना करना पड़ा था, मगर सपोर्ट करने वाले अफ़सरों की भी कमी नहीं थी।

Srividya ने कहा जैसा कि फिल्म में दिखाया गया है, यूनिट में महिलाओं के लिए अलग शौचालय और चेंजिंग रूम नहीं थे। प्रारंभिक कठिनाइयों के बाद, हमने अपने साथी अधिकारियों के साथ सीमित संसाधनों को साझा किया और जब भी जरूरत पड़ी, उन्होंने हमेशा इसमें मदद की। जैसा की फिल्म में दिखाया गया हैं हमारे साथी अधिकारियों द्वारा हमारे साथ कभी दुर्व्यवहार या अपमान नहीं किया गया।

“Gunjan Saxena” पर Srividya का कहना कि मैं कारगिल में उड़ान भरने वाली पहली महिला पायलट हूँ

फिल्म में, गुंजन सक्सेना को कारगिल संचालन में उड़ान भरने वाली एकमात्र महिला पायलट के रूप में दिखाया गया लेकिन श्रीविद्या ने इस तथ्य को गलत बताया हैं। उनके अनुसार हम ऊधमपुर में साथ में तैनात थे और जब कारगिल युद्ध शुरू हुआ तो श्रीविद्या पुरुष अफ़सरों के साथ भेजी जाने वाली पहली महिला अफ़सर थीं। ऑपरेशन के कुछ दिनों के बाद, गुंजन सक्सेना अगले सेट के साथ श्रीनगर आयी थी।

इसी के साथ Srividya कहना चाहती हैं कि आने वाली पीढ़ी को गलत चीज़ न दिखाई जाए। मैं केवल यह चाहती हूं कि यह एक बायोपिक है, इसलिए गुंजन को फिल्म को प्रसारित करने से पहले तथ्यों को दिखाना चाहिए और आईएएफ को सकारात्मक रोशनी में चित्रित करना चाहिए। मैंने भी कई कठिनाईयों का सामना किया लेकिन हमें शायद यह प्रसिद्धि हमारे लिंग के कारण दी गई जिसका मैं समर्थन नहीं करती। रक्षा सेवाओं में, पुरुष या महिला के बीच कोई असमानता नहीं है। हम सभी वर्दी में अधिकारी हैं।

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